Bada Mangal 2026 Puja Shubh Muhurat and Vidhi: आज 5 मई 2026 को ज्येष्ठ मास का प्रथम ‘बड़ा मंगल’ है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, जिसे उत्तर भारत में विशेष रूप से ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर त्रेतायुग में भगवान श्री राम और उनके परम भक्त हनुमान जी की पहली भेंट हुई थी। आज के दिन की गई भक्ति न केवल संकटों का नाश करती है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार भी खोलती है। आइए जानते हैं आज पूजा के सबसे सटीक मुहूर्त और जरूरी सावधानियां।
बड़ा मंगल 2026: इन 2 शुभ मुहूर्त में करें पूजा
शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी की पूजा यदि विशेष मुहूर्त में की जाए, तो उसका फल कई गुना बढ़ जाता है। आज ब्रह्म मुहूर्त के बाद अब ये दो समय सबसे उत्तम हैं:
-
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक। यह समय किसी भी शुभ कार्य और विशेष अनुष्ठान के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
-
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:57 बजे से लेकर 07:19 बजे तक। जो लोग शाम की आरती या व्रत पारण करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय कल्याणकारी है।
बुढ़वा मंगल की सरल और प्रभावशाली पूजा विधि
आज के दिन बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए भक्त इस विधि का पालन करें:
-
शुद्धिकरण: प्रातः काल स्नान के बाद लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
-
स्थापना: पूजा घर में हनुमान जी की प्रतिमा के सामने घी या चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
-
श्रृंगार और अर्पण: प्रभु को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। उन्हें लाल फूल और तुलसी दल चढ़ाएं।
-
भोग: आज के दिन बूंदी, बेसन के लड्डू या गुड़-चने का भोग लगाना अत्यंत शुभ होता है।
-
मंत्र और पाठ: हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें। ‘ॐ हनुमते नमः’ मंत्र की एक माला (108 बार) का जाप करें।
-
दान: पूजा के उपरांत अपनी सामर्थ्य अनुसार गरीबों को भोजन कराएं या प्याऊ लगवाएं।
ज्येष्ठ मंगलवार व्रत के कड़े नियम और सावधानी
ज्येष्ठ मास के मंगलवारी व्रत में अनुशासन का बहुत महत्व है। यदि आप आज व्रत रख रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
-
सात्विक आहार: व्रत के दौरान केवल फल, दूध या सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का पूरी तरह त्याग करें।
-
मानसिक संयम: आज के दिन क्रोध न करें और न ही किसी को अपशब्द बोलें। ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।
-
वर्जित कार्य: आज किसी जरूरतमंद को अपने द्वार से खाली हाथ न लौटाएं। आलस्य का त्याग करें और दिनभर हनुमान जी का स्मरण करते रहें।
बड़ा मंगल का धार्मिक महत्व और भंडारा परंपरा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भीम का अहंकार तोड़ने के लिए हनुमान जी ने इसी दिन वृद्ध वानर का रूप धरा था, इसलिए इसे बुढ़वा मंगल कहते हैं। लखनऊ समेत पूरे उत्तर भारत में आज के दिन जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया जाता है। माना जाता है कि राहगीरों को ठंडा पानी पिलाने और भोजन कराने से मंगल ग्रह के दोष शांत होते हैं और शनि की ढैया व साढ़ेसाती से मुक्ति मिलती है।
The News 11 – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया