‘7 दिन के लिखित नोटिस के बिना कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रोफेसर रहे और मणिपुर की इनर मणिपुर सीट से कांग्रेस के लोकसभा सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजाम (Angomcha Bimol Akoijam) को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत से बड़ी कानूनी राहत मिली है। जेएनयू की छात्राओं द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के एक मामले में दिल्ली पुलिस की संभावित गिरफ्तारी की आशंका के बीच कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यदि जांच के दौरान सांसद की गिरफ्तारी जरूरी होती है, तो पुलिस को उन्हें 7 दिन पहले लिखित नोटिस देना होगा। अदालत के इस आदेश के बाद कांग्रेस सांसद को गिरफ्तारी या किसी भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई (Coercive Action) से एक बड़ा सुरक्षा कवच मिल गया है। इसके साथ ही विशेष अदालत ने सांसद की अग्रिम जमानत याचिका का निपटारा कर दिया है।

यह पूरा विवाद जेएनयू के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स से जुड़ा हुआ है। विश्वविद्यालय की करीब 11 छात्राओं ने अकोइजाम पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद अकोइजाम ने आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें राजनीति से प्रेरित बताया और कोर्ट से अंतरिम सुरक्षा की गुहार लगाई थी। अदालत में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सांसद जांच में पूरी तरह से सहयोग कर रहे हैं और 15 अक्टूबर को समन मिलने के बाद वसंत कुंज नॉर्थ थाने में पेश होकर अपना बयान दर्ज करा चुके हैं। इसी सहयोग के आधार पर पुलिस ने भरोसा दिया कि बिना अग्रिम सूचना के उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

अंगोमचा बिमोल अकोइजाम ने शुरुआत में पटियाला हाउस कोर्ट का रुख कर अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने और अग्रिम जमानत की मांग की थी, जहां से उन्हें 29 अक्टूबर को अस्थायी राहत दी गई थी। हालांकि, चुने हुए जनप्रतिनिधियों (MPs/MLAs) से जुड़े मामलों की विशेष सुनवाई के क्षेत्राधिकार के कारण याचिका को राउज एवेन्यू कोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया। विशेष न्यायाधीश दिग्भिनय सिंह की अदालत ने दिल्ली पुलिस को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जांच में ऐसे कोई नए तथ्य सामने आते हैं जिसके आधार पर हिरासत की आवश्यकता महसूस हो, तो पुलिस को कम से कम 7 कार्यदिवसों का लिखित नोटिस सांसद को देना ही होगा। इस समयावधि के मिलने से सांसद को भविष्य में जरूरत पड़ने पर दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाने का वैधानिक अधिकार मिल गया है।

दूसरी तरफ, यौन उत्पीड़न की इन शिकायतों के आधार पर जेएनयू की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अकोइजाम की सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया था। हालांकि, सांसद ने इस बर्खास्तगी को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के इस आदेश पर रोक लगा दी और नोटिस जारी कर दिया। कानूनी जानकारों का कहना है कि राउज एवेन्यू कोर्ट के 7-दिन के नोटिस वाले फैसले ने सांसद अकोइजाम को अपने खिलाफ चल रही आपराधिक और प्रशासनिक जांच का सामना करने के लिए पर्याप्त समय और कानूनी सुरक्षा प्रदान की है।

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