नई दिल्ली। नीट पेपर लीक विवाद (NEET Paper Leak Contest) और शिक्षा प्रणाली में सुधारों के बाद देशभर में जारी छात्र आंदोलन शांत हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिक्षा प्रणाली में सुधार के आश्वासन और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ छात्रों की इस लोकतांत्रिक जीत की चर्चा पूरे देश में है। हालांकि, इस पूरे आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर (Anupam Kher) ने गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है।
अनुपम खेर ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर मर्यादा की सीमा लांघने वाले प्रदर्शनकारियों और नागरिकों को करारा जवाब दिया है।
“सवाल पूछना जरूरी, लेकिन भाषा की मर्यादा भी कायम रहे”
अनुपम खेर ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “सवाल पूछना जरूरी है। सरकारों को जवाबदेह बनाना भी जरूरी है। लेकिन भाषा की मर्यादा में।”
वीडियो में अपनी बात रखते हुए अनुपम खेर ने कहा:
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समाधान ही लोकतंत्र की ताकत: “आंदोलन खत्म हो गया, बहुत सी बातें स्पष्ट हो गईं। यह साबित हो गया कि जब छात्र अपनी बात ईमानदारी से रखते हैं तो लोकतंत्र उन्हें सुनता है। शायद यह संवाद पहले हो सकता था, शायद तब परिस्थितियां यहां तक नहीं पहुंचतीं। लेकिन समाधान निकला और यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है।”
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प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा पर दुख: अनुपम खेर ने स्पष्ट किया कि विरोध करना लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन पीएम मोदी के लिए इस्तेमाल की गई भाषा ने उन्हें व्यथित किया है। उन्होंने कहा, “कैमरे के सामने सार्वजनिक मंचों पर जिस तरह से भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के लिए अपमानजनक और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया गया, उसे देखकर मन व्यथित हुआ। यह केवल एक व्यक्ति के बारे में नहीं है, यह उस संस्कृति का प्रश्न है जिसे हम आने वाली पीढ़ी के लिए छोड़कर जाना चाहते हैं।”
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गालियों से बहस नहीं, सिर्फ शोर बचता है: खेर ने आगे कहा, “हम किसी नेता से असहमत हो सकते हैं, उनसे सवाल पूछ सकते हैं। यही तो लोकतंत्र की आत्मा है। लेकिन जब तर्क खत्म हो जाते हैं और गालियां शुरू हो जाती हैं, तब बहस नहीं बचती, सिर्फ शोर बचता है।”
“विरोध से दुख नहीं, गिरी हुई भाषा से दुख है”
अनुपम खेर ने पीएम मोदी के लंबे सार्वजनिक जीवन और देश के सम्मान का जिक्र करते हुए कहा:
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पीएम मोदी का योगदान: “श्री नरेंद्र मोदी जी पिछले 30 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में हैं। देश की जनता ने उन्हें बार-बार अपना विश्वास दिया है। उन्होंने अपना पूरा जीवन सार्वजनिक सेवा में लगाया है और विश्व मंच पर भारत की आवाज को एक नई पहचान दी है। यह जरूरी नहीं कि हम उनके सभी निर्णयों से सहमत हों, लेकिन मेरा मानना है कि किसी भी निर्वाचित प्रधानमंत्री की गरिमा का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।”
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भाषा के गिरते स्तर पर चिंता: अनुपम खेर ने कहा, “मुझे इस बात का दुख नहीं है कि उनका विरोध हुआ। लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक है। मुझे इस बात का दुख है कि विरोध की भाषा इतनी छोटी हो गई है। और यह केवल युवाओं तक ही सीमित नहीं रही, हर उम्र के लोग इस गिरी हुई भाषा का हिस्सा बन गए।”
“विश्व गुरु बनने के लिए ऊंची सोच और भाषा जरूरी”
देश के चरित्र और नागरिकों की जिम्मेदारी पर बात करते हुए अनुपम खेर ने कहा:
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संस्कार और भाषा ही चरित्र: “जब हम गरिमा भूल जाते हैं, तो आने वाली पीढ़ियों से अच्छे संस्कारों की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? हम अक्सर कहते हैं कि हम भारत को विश्व गुरु बनाना चाहते हैं। लेकिन विश्व गुरु सिर्फ अर्थव्यवस्था, विज्ञान या टेक्नोलॉजी में ही आगे नहीं होता। विश्व गुरु बनने के लिए ऊंची सोच और ऊंची भाषा का होना भी जरूरी है।”
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सभ्य भारत का निर्माण: उन्होंने अंत में अपील करते हुए कहा, “हम असहमति जताएं, बिल्कुल जताएं। सवाल पूछें, बिल्कुल पूछें। हमें सरकार से जवाब भी मांगने चाहिए। लेकिन हमें अपनी भाषा को इतना घटिया नहीं होने देना चाहिए कि हमारे विचारों से पहले हमारी भाषा ही हमारे चरित्र की पोल खोल दे। क्योंकि किसी भी देश की असली पहचान उसके नेताओं से नहीं, बल्कि नागरिकों की भाषा और व्यवहार से होती है। हमें ऐसा भारत बनाना चाहिए जहां विचारों में तो मतभेद हों, लेकिन दिलों में दूरियां न हों।”
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