
दक्षिण-पूर्व एशियाई देश थाईलैंड इन दिनों अपने इतिहास की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में पिछले 48 घंटों से अधिक समय से जारी मूसलाधार मानसूनी बारिश ने भयंकर तबाही मचा दी है। स्थिति इतनी विकराल हो चुकी है कि राजधानी बैंकॉक समेत कुल 29 प्रांत बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। आपदा रोकथाम और शमन विभाग (DDPM) द्वारा मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश भर में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 23 हो गई है, जबकि अकेले राजधानी बैंकॉक में ही लगभग 7 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
बैंकॉक में बाढ़ का विकराल रूप: स्कूल बंद, 7 हजार लोग शेल्टर होम में शरण लेने को मजबूर
थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में पिछले दो दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण शहर के कई प्रमुख इलाके जलमग्न हो चुके हैं। मूसलाधार बारिश का यह दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसके चलते प्रशासन को बैंकॉक में आधिकारिक तौर पर आपदा की घोषणा करनी पड़ी है। एहतियात के तौर पर शहर के सभी स्कूलों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने के लिए राजधानी भर में 230 से अधिक राहत शिविर (शेल्टर होम) बनाए गए हैं, जहां इस समय करीब 7,000 विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं।
आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक, बैंकॉक में चार लोगों की जान गई है, जबकि देश के तटीय और पूर्वी इलाकों में भी भारी क्षति हुई है। बैंकॉक और समुद्र के तट के बीच स्थित समुत प्राकान प्रांत में 8 लोगों की मौत दर्ज की गई है, और पूर्वी प्रांत सा काएओ में 6 लोगों की जान चली गई है। इसके अलावा बैंकॉक के दक्षिण-पूर्व में स्थित चंथाबुरी तथा राजधानी के उत्तर में स्थित अयुथ्या और साराबुरी प्रांतों से भी कई लोगों की मौत की सूचना मिली है। सड़कों पर समंदर जैसा नजारा है, जहां कारें और वाहन पूरी तरह पानी में डूबे नजर आ रहे हैं। यातायात व्यवस्था ठप होने के कारण जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर चुका है।
दलदली जमीन और नहरों का उफान: पानी की निकासी में लग सकता है एक हफ्ता
थाईलैंड में अमूमन सितंबर का महीना सबसे अधिक वर्षा वाला महीना माना जाता है, लेकिन बैंकॉक के स्थानीय नागरिकों और बुजुर्गों का कहना है कि इस साल की बाढ़ पिछले कई दशकों की तुलना में कहीं अधिक विनाशकारी है। गौरतलब है कि बैंकॉक शहर मूल रूप से दलदली जमीन पर बसाया गया है, जिसके चारों तरफ और भीतर नहरों का एक विशाल जाल बिछा हुआ है। भारी बारिश के चलते ये सभी नहरें और नदियां अपने खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और उनका पानी रिहायशी इलाकों में घुस आया है।
जलभराव को कम करने के लिए प्रशासन द्वारा स्थापित पंपिंग स्टेशन पिछले कई दिनों से दिन-रात अपनी पूरी क्षमता के साथ पानी खींचने के काम में जुटे हुए हैं। इसके बावजूद बैंकॉक के गवर्नर चाडचार्ट सिट्टीपुंट ने रविवार को मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया था कि शहर से बाढ़ के पानी को पूरी तरह बाहर निकालने और स्थिति को सामान्य करने में कम से कम एक हफ्ते का समय और लग सकता है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का केंद्र माने जाने वाले सुवर्णभूमि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्रियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं और उड़ानों के संचालन पर भी असर पड़ा है।
ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का असर
पर्यावरण वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे तापमान और जीवाश्म ईंधन के अत्यधिक उत्सर्जन के कारण ग्लोबल वार्मिंग का संकट गहराता जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप मानसून के मौसम में होने वाली वर्षा की तीव्रता, आवृत्ति और विनाशकारी क्षमता में भारी वृद्धि देखने को मिल रही है। थाईलैंड की इस मौजूदा त्रासदी ने एक बार फिर दुनिया भर के देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रति गंभीर कदम उठाने के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया है। सरकार और राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में भोजन, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर जुटी हुई हैं।
The News 11 – Hindustan Newspaper, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया