एग फ्रीज कराने का बना रही हैं प्लान? जानिए अंडा प्रिजर्व कराने की सबसे सही उम्र

आज के आधुनिक दौर में महिलाएं शिक्षा, करियर, वित्तीय आत्मनिर्भरता और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को लेकर पूरी तरह सजग हैं। कई बार सही लाइफ पार्टनर की तलाश, करियर के अहम पड़ाव या किसी गंभीर मेडिकल स्थिति (जैसे कैंसर का इलाज या एंडोमेट्रियोसिस) के कारण शादी और मां बनने के फैसले में देरी होना स्वाभाविक हो जाता है। लेकिन महिला शरीर की जैविक घड़ी (बायोलॉजिकल क्लॉक) उम्र के साथ तेजी से आगे बढ़ती है। 30 की उम्र पार करते ही महिलाओं के अंडों (Eggs) की संख्या और उनकी गुणवत्ता (Quality) में प्राकृतिक रूप से गिरावट आने लगती है।

ऐसे में मेडिकल साइंस की आधुनिक तकनीक ‘एग फ्रीजिंग’ (ओसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन) महिलाओं के लिए एक वरदान और रिप्रोडक्टिव फ्रीडम (प्रजनन स्वतंत्रता) का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। एग फ्रीजिंग के जरिए महिलाएं अपनी युवावस्था के स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण अंडों को सुरक्षित करवाकर भविष्य में जब चाहें, तब गर्भधारण का सुख प्राप्त कर सकती हैं। यदि आप भी एग फ्रीजिंग कराने का विचार कर रही हैं, तो फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स (प्रजनन विशेषज्ञों) के अनुसार सही उम्र, पूरी प्रक्रिया, खर्च, सफलता दर और जरूरी सावधानियों को पहले से समझ लेना बेहद आवश्यक है।

एग फ्रीजिंग क्या है? जानिए मातृत्व को सुरक्षित करने की आधुनिक विट्रिफिकेशन तकनीक

एग फ्रीजिंग, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ‘मैच्योर ओसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन’ (Mature Oocyte Cryopreservation) कहा जाता है, एक ऐसी आधुनिक असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) है जिसमें महिला की ओवरी (अंडाशय) से परिपक्व अंडों को निकालकर भविष्य में उपयोग के लिए अत्यधिक कम तापमान पर फ्रीज करके सुरक्षित रखा जाता है।

  • विट्रिफिकेशन (Vitrification) तकनीक: पुराने समय में धीमी गति से फ्रीज करने (Slow Freezing) की तकनीक का उपयोग होता था, जिसमें अंडों के भीतर बर्फ के क्रिस्टल बनने से वे नष्ट हो जाते थे। लेकिन अब उन्नत ‘विट्रिफिकेशन’ (फ्लैश-फ्रीजिंग) तकनीक का उपयोग किया जाता है। इसमें अंडों को माइनस 196 डिग्री सेल्सियस (-196°C) पर लिक्विड नाइट्रोजन में सेकंडों के भीतर जमा दिया जाता है, जिससे उनकी जैविक आयु उसी क्षण रुक जाती है।

  • भविष्य में उपयोग: जब महिला भविष्य में मां बनने के लिए तैयार होती है, तब इन फ्रीज किए गए अंडों को डीफ्रॉस्ट (पिघलाया) किया जाता है, लैब में पति अथवा डोनर के स्पर्म के साथ आईवीएफ (IVF) या आईसीएसआई (ICSI) तकनीक से फर्टिलाइज कर भ्रूण (Embryo) बनाया जाता है और फिर उसे महिला के गर्भाशय (Uterus) में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

अंडा फ्रीज कराने की सबसे सही उम्र क्या है? 20s और 30s में एग क्वालिटी का जैविक गणित

फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार एग फ्रीजिंग कराने के लिए सही उम्र का चुनाव सबसे निर्णायक पहलू होता है। महिला जन्म के समय सीमित संख्या में अंडों (लगभग 10 से 20 लाख) के साथ जन्म लेती है और उम्र बढ़ने के साथ यह संख्या कभी बढ़ती नहीं, बल्कि लगातार घटती जाती है।

  • 25 से 35 वर्ष की उम्र (सर्वोत्तम जैविक विंडो): 25 से 32 वर्ष की आयु को एग फ्रीजिंग के लिए ‘गोल्डन पीरियड’ माना जाता है। इस उम्र में महिला के अंडों की संख्या (ओवेरियन रिजर्व) अधिक होती है और उनमें क्रोमोसोमल असामान्यताएं (जेनेटिक डिफेक्ट्स) न के बराबर होती हैं। 35 वर्ष से पहले एग फ्रीज कराने पर भविष्य में सफल गर्भधारण की संभावना 70 से 80 प्रतिशत तक होती है।

  • 35 से 38 वर्ष की उम्र (मध्यम विकल्प): 35 की उम्र के बाद अंडों की संख्या और क्वालिटी दोनों में तेजी से गिरावट आती है। इस आयु वर्ग की महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ अंडे प्राप्त करने के लिए कभी-कभी एक से अधिक ‘ओवुलेशन स्टिम्युलेशन साइकल’ से गुजरना पड़ सकता है।

  • 38 वर्ष से अधिक की उम्र: 38 या 40 की उम्र के बाद फ्रीज किए गए अंडों से सफल प्रेग्नेंसी की संभावना काफी कम हो जाती है, क्योंकि इस उम्र में अंडों में जेनेटिक म्यूटेशन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि 35 से पहले यह फैसला ले लेना सबसे समझदारी भरा कदम है।

एग फ्रीजिंग की पूरी प्रक्रिया: इंजेक्शन से लेकर एग रिट्रीवल और सुरक्षित स्टोरेज तक के 4 चरण

एग फ्रीजिंग की पूरी प्रक्रिया में लगभग 2 से 3 सप्ताह का समय लगता है। इसे 4 मुख्य चरणों में समझा जा सकता है:

  • चरण 1: ओवेरियन स्टिम्युलेशन (हार्मोनल इंजेक्शन): सामान्य मासिक धर्म चक्र में महिला के शरीर में केवल एक अंडा परिपक्व होता है। लेकिन एग फ्रीजिंग के लिए डॉक्टर चाहते हैं कि एक ही चक्र में 10 से 15 स्वस्थ अंडे विकसित हों। इसके लिए पीरियड्स के दूसरे या तीसरे दिन से महिला को लगभग 10 से 12 दिनों तक रोजाना हार्मोन्स (FSH और LH) के इंजेक्शन लगाए जाते हैं।

  • चरण 2: फॉलिकल मॉनिटरिंग और ट्रिगर शॉट: इंजेक्शन के दौरान महिला की हर 2-3 दिन में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट (एस्ट्रोजन लेवल) के जरिए निगरानी की जाती है ताकि देखा जा सके कि अंडे किस गति से बढ़ रहे हैं। जब अंडे 18 से 20 मिमी के आकार में पहुंच जाते हैं, तब अंडों के अंतिम परिपक्वता के लिए एक ‘ट्रिगर शॉट’ (hCG या GnRH एगोनिस्ट) दिया जाता है।

  • चरण 3: एग रिट्रीवल (अंडे निकालने की प्रक्रिया): ट्रिगर शॉट के ठीक 34 से 36 घंटे बाद अस्पताल में एक डे-केयर प्रक्रिया के तहत अंडे निकाले जाते हैं। महिला को हल्का एनेस्थीसिया (बेहोशी) दिया जाता है जिससे कोई दर्द नहीं होता। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड की मदद से योनि मार्ग के जरिए एक बारीक सुई अंडाशय तक पहुंचाते हैं और फॉलिकल्स से फ्लूइड व अंडों को बाहर खींच लेते हैं। इस प्रक्रिया में केवल 15 से 20 मिनट का समय लगता है और 2-3 घंटे के आराम के बाद महिला घर जा सकती है।

  • चरण 4: विट्रिफिकेशन और क्रायो-स्टोरेज: निकाले गए अंडों में से केवल परिपक्व (Mature M2) अंडों को छांटा जाता है और उन्हें तुरंत -196°C लिक्विड नाइट्रोजन टैंक में सुरक्षित स्टोर कर दिया जाता है। ये अंडे अगले 10 से 15 वर्षों तक पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।

एग फ्रीज कराने से पहले जरूरी मेडिकल टेस्ट: AMH लेवल और ओवेरियन रिजर्व की जांच

एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया शुरू करने से पहले फर्टिलिटी क्लीनिक में महिला के कुछ महत्वपूर्ण बुनियादी टेस्ट किए जाते हैं:

  • एंटी-मुलेरियन हार्मोन टेस्ट (AMH Blood Test): यह रक्त परीक्षण यह बताता है कि आपकी ओवरी में अंडों का भंडार (ओवेरियन रिजर्व) कितना बचा है। 1.5 से 4.0 ng/mL के बीच का AMH स्तर बहुत अच्छा माना जाता है।

  • एंट्रल फॉलिकल काउंट (AFC Ultrasound): ट्रांसवेजाइनल सोनोग्राफी के जरिए दोनों अंडाशयों में मौजूद छोटे फॉलिकल्स की गिनती की जाती है।

  • हार्मोनल प्रोफाइल: इसमें थायरॉयड (TSH), प्रोलैक्टिन, एफएसएच (FSH) और एस्ट्राडियोल का टेस्ट शामिल होता है।

  • संक्रामक रोग स्क्रीनिंग: एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी, सिफलिस आदि की जांच की जाती है ताकि क्रायो-स्टोरेज में कोई संक्रमण न फैले।

एग फ्रीजिंग के फायदे, सफलता दर और ध्यान रखने योग्य संभावित जोखिम (OHSS)

एग फ्रीजिंग महिलाओं को अपने जीवन और करियर को अपने अनुसार जीने की आजादी देती है। यह उन महिलाओं के लिए जीवनरक्षक है जिन्हें कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी से गुजरना है, क्योंकि कैंसर का इलाज अंडों को नष्ट कर देता है।

  • ओवेरियन हाइपरस्टिम्युलेशन सिंड्रोम (OHSS): हार्मोनल इंजेक्शन के कारण कुछ महिलाओं के अंडाशय अत्यधिक उत्तेजित हो जाते हैं, जिससे पेट में सूजन, दर्द, ब्लोटिंग और मतली की समस्या हो सकती है। हालांकि आधुनिक दवाओं और ट्रिगर शॉट्स से OHSS का खतरा 1-2 प्रतिशत से भी कम रह गया है।

  • सफलता की गारंटी नहीं: यह समझना बहुत जरूरी है कि एग फ्रीजिंग एक ‘इंश्योरेंस पॉलिसी’ की तरह है, शत-प्रतिशत लाइव बर्थ की गारंटी नहीं। सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि कितने अंडे फ्रीज किए गए थे और महिला की उस समय उम्र क्या थी। आमतौर पर एक सफल बच्चे के जन्म के लिए कम से कम 10 से 15 परिपक्व अंडों को फ्रीज करने की सलाह दी जाती है।

खान-पान और लाइफस्टाइल टिप्स: एग क्वालिटी बेहतर करने के लिए क्या करें और क्या नहीं

यदि आप आने वाले कुछ महीनों में एग फ्रीजिंग कराने की योजना बना रही हैं, तो कम से कम 3 महीने पहले से अपनी जीवनशैली में ये सुधार करें:

  • एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर आहार लें: हरी पत्तेदार सब्जियां, अखरोट, बादाम, अलसी के बीज, जामुन, संतरा और एवोकाडो अपनी डाइट में शामिल करें।

  • सप्लीमेंट्स का सेवन: डॉक्टर के परामर्श से कोएंजाइम Q10 (CoQ10), फोलिक एसिड, विटामिन D3 और ओमेगा-3 फैटी एसिड लें। ये सप्लीमेंट्स अंडों की माइटोकॉन्ड्रियल एनर्जी और डीएनए क्वालिटी को सुधारते हैं।

  • धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी: सिगरेट में मौजूद टॉक्सिन्स अंडों के नुकसान को तेज करते हैं और डीएनए को डैमेज करते हैं। इसलिए स्मोकिंग और अल्कोहल का तुरंत त्याग करें।

  • तनाव कम करें और वजन नियंत्रित रखें: अत्यधिक तनाव कोर्टिसोल बढ़ाता है जो प्रजनन हार्मोन्स को असंतुलित करता है। नियमित योग, मेडिटेशन और 7-8 घंटे की नींद सुनिश्चित करें।

Check Also

क्या बढ़ता हुआ मोटापा सचमुच छीन रहा है आपकी जिंदगी के 10 साल? नई मेडिकल रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

आज की तेज रफ्तार और भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा (Obesity) केवल शारीरिक सुंदरता या …