
वैश्विक कूटनीति के सबसे बड़े मंच संयुक्त राष्ट्र (UN) में पाकिस्तान की खोखली बयानबाजी और धमकियों का भारत ने एक बार फिर करारा और बेबाक जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 'राइट ऑफ रिप्लाई' (Right of Reply) का इस्तेमाल करते हुए स्पष्ट कर दिया कि भारत किसी भी परिस्थिति में पाकिस्तान की परमाणु ब्लैकमेलिंग के आगे झुकने वाला नहीं है। निशस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी यूएन समिति की बैठक के दौरान भारतीय दूत अनमोल शेर सिंह बेदी ने दो टूक शब्दों में कहा कि परमाणु हथियारों को कूटनीति या राजकीय कामकाज (statecraft) का सामान्य उपकरण नहीं बनाया जा सकता। भारत के इस आक्रामक और तथ्यात्मक रुख ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के नापाक मंसूबों का पर्दाफाश कर दिया है और दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।
UN में पाकिस्तान के अनर्गल प्रलाप पर भारत का पलटवार: परमाणु राग का निकाला दम
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान अपनी पुरानी आदत के मुताबिक जब भी घिरता है, तो विषय से ध्यान भटकाने के लिए जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उछाले बिना नहीं रहता और अपनी असफलता छिपाने के लिए परमाणु हथियारों की धमकी देने लगता है। लेकिन इस बार भारतीय दूत ने पाकिस्तान की इस रणनीति की हवा निकाल दी। भारतीय राजनयिक ने कहा कि भारत की सैन्य और परमाणु क्षमताएं पूरी तरह से रक्षात्मक (defensive in nature) हैं और देश के सुरक्षा परिवेश को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। भारत ने कहा कि जो देश गैर-राज्य कलाकारों (non-state actors) या आतंकवादी समूहों की आड़ लेकर हिंसा फैलाते हैं, वे अपनी राज्यीय जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। भारत का आत्मरक्षा का अधिकार (right of self-defence) पूरी तरह से सुरक्षित है और कोई भी मुल्क परमाणु गीदड़भभकी देकर भारत को अपने नागरिकों की रक्षा करने से नहीं रोक सकता।
भारत ने खींची 3 लाल रेखाएं: आतंकवाद और परमाणु धमकी पर ज़ीरो टॉलरेंस
संयुक्त राष्ट्र में भारतीय दूत ने दुनिया के सामने भारत की नई सुरक्षा नीति के तीन प्रमुख और स्पष्ट आयाम प्रस्तुत किए, जिसने इस्लामाबाद के हुक्मरानों की नींद उड़ा दी है:
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पहला नियम: भारत पर होने वाले किसी भी आतंकी हमले का करारा, त्वरित और माकूल जवाब दिया जाएगा।
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दूसरा नियम: भारत किसी भी कीमत पर परमाणु ब्लैकमेलिंग या धमकियों के आगे नहीं झुकेगा।
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तीसरा नियम: भारत आतंकवाद को पनाह देने वालों और उसके आकाओं में कोई फर्क नहीं करेगा; दोनों को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
भारत के इन तीन सिद्धांतों ने दुनिया को यह साफ कर दिया है कि अब पाकिस्तान की छद्म युद्ध (proxy war) की नीति चलने वाली नहीं है।
गैर-जिम्मेदार परमाणु देशों पर अंतर्राष्ट्रीय निगरानी की मांग
अपने संबोधन में भारतीय राजनयिक ने वैश्विक समुदाय और हथियार आपूर्ति करने वाले जिम्मेदार देशों (responsible suppliers) से भी अपील की कि वे परमाणु सामग्री और उन्नत सैन्य तकनीकों के हस्तांतरण के मामले में उच्चतम स्तर की सतर्कता बरतें। भारत ने अप्रत्यक्ष रूप से चीन और पाकिस्तान की सांठगांठ की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी कि गैर-जिम्मेदार हाथों में खतरनाक तकनीक का पहुंचना केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। जब कोई देश अस्थिरता को अपने राजनीतिक लाभ का जरिया बना लेता है, तो वैश्विक शांति के प्रयास प्रभावित होते हैं। इसलिए दुनिया को ऐसे देशों पर न केवल लगाम लगानी चाहिए, बल्कि उनके परमाणु तंत्र की निष्पक्ष समीक्षा भी करनी चाहिए।
वैश्विक पटल पर पाकिस्तान का बढ़ता अकेलापन और भारत का कूटनीतिक दबदबा
संयुक्त राष्ट्र में भारत द्वारा दिए गए इस करारे जवाब ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वैश्विक मंचों पर भारत का रुख कितना अडिग और परिपक्व है। आतंकवाद और परमाणु सुरक्षा के मुद्दे पर भारत की स्पष्ट नीति ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में नई दिल्ली की विश्वसनीयता को और मजबूत किया है। दूसरी ओर, अपनी आर्थिक कंगाली और आंतरिक संघर्षों से जूझ रहा पाकिस्तान जब भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ अनर्गल प्रलाप करता है, उसे हर बार मुंह की खानी पड़ती है। भारतीय विदेश नीति की इस आक्रामक और सशक्त शैली ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि शांति की चाहत को भारत की कमजोरी समझने की भूल कोई भी मुल्क न करे।
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