
अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार और कूटनीति के गलियारों में इन दिनों एक बार फिर से भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की ताकत और उसके खौफ की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। अपनी अचूक मारक क्षमता, अद्वितीय गति और अत्याधुनिक तकनीक के लिए पूरी दुनिया में लोहा मनवा चुकी ब्रह्मोस मिसाइल के नाम से ही पड़ोसी देश पाकिस्तान की नींद उड़ी हुई है, जिसके चलते उसने अपनी रणनीतिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। प्राप्त खुफिया रिपोर्टों और रक्षा विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान ने भारतीय मिसाइलों के आसन्न खतरे और संभावित हमलों से अपने महत्वपूर्ण वायुसेना अड्डों यानी एयरबेस को बचाने के लिए चीन से खरीदे गए आधुनिक एलडी-2000 यानी एलडी-2000 क्लोज-इन वेपन सिस्टम को तैनात कर दिया है। इस चीनी एंटी-मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती यह साफ दर्शाती है कि भारतीय सशस्त्र बलों की बढ़ती ताकत से पाकिस्तान किस कदर डरा हुआ है और वह अपनी सरहद की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से विदेशी हथियारों पर निर्भर होता जा रहा है। आधुनिक युद्धकौशल और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से यह घटनाक्रम दक्षिण एशिया के सामरिक परिदृश्य में एक बहुत बड़ा बदलाव लेकर आया है, जिस पर दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों की पैनी नजर टिकी हुई है।
क्या है चीनी LD-2000 एयर डिफेंस सिस्टम और कैसे काम करती है इसकी तकनीक जिसे पाकिस्तान ने बनाया है अपना रक्षा कवच
पाकिस्तान द्वारा अपने एयरबेस की सुरक्षा के लिए तैनात किए गए इस चीनी एलडी-2000 सिस्टम के बारे में जब रक्षा विशेषज्ञों ने गहराई से पड़ताल की, तो इसकी कई चौंकाने वाली तकनीकी विशेषताएं सामने आईं। यह सिस्टम मुख्य रूप से एक मोबाइल क्लोज-इन वेपन सिस्टम यानी सीआईडब्ल्यूएस है, जिसे विशेष रूप से दुश्मन की कम दूरी से आने वाली क्रूज मिसाइलों, गाइडेड बमों और लड़ाकू विमानों को हवा में ही तबाह करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें एक शक्तिशाली रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम लगा होता है जो बेहद कम समय में तेजी से आगे बढ़ने वाले लक्ष्यों को खुद ब खुद पहचान कर उन पर सटीक निशाना साध सकता है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-बैरेल गन और आधुनिक गोलियों की बौछार है जो एक सेकंड में दर्जनों राउंड फायर करके आसमान में ही आने वाले खतरे को मलबे में बदल सकती है। हालांकि चीन द्वारा निर्मित इन हथियारों की विश्वसनीयता और युद्ध के मैदान में उनके वास्तविक प्रदर्शन को लेकर अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजारों में हमेशा से सवालिया निशान लगते रहे हैं, लेकिन फिर भी पाकिस्तान अपनी घबराहट को छुपाने के लिए इन पर आंख मूंदकर भरोसा कर रहा है।
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की वह बेजोड़ ताकत जिसके खौफ से पाकिस्तान ने खड़े किए यह सुरक्षा घेरे
भारतीय सेना के बेड़े में शामिल ब्रह्मोस मिसाइल आज के समय में दुनिया की सबसे तेज और सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है, जिसका कोई तोड़ फिलहाल दुनिया के पास नहीं है। यह मिसाइल आवाज की गति से भी लगभग तीन गुना यानी करीब 2.8 से 3.0 मैक की तीव्र गति से उड़ान भरती है, जिससे दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को संभलने या प्रतिक्रिया देने का मौका तक नहीं मिलता है। यही मुख्य कारण है कि पाकिस्तान के सैन्य रणनीतिकार इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि यदि युद्ध की स्थिति में भारत ने ब्रह्मोस का रुख उनकी तरफ कर दिया, तो उनके पारंपरिक डिफेंस सिस्टम ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएंगे। अपनी इसी घबराहट और अनहोनी के डर से पाकिस्तान लगातार अपने प्रमुख एयरबेस और सामरिक ठिकानों के चारों ओर इस तरह के चीनी सुरक्षा कवच लगाने के लिए मजबूर हो रहा है ताकि वह अपनी कमियों को कुछ हद तक छुपा सके। लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस जैसी आधुनिक और बदलती दिशा में मार करने वाली मिसाइलों के सामने इस तरह के शुरुआती डिफेंस सिस्टम ज्यादा देर तक टिक नहीं सकते हैं और भारत की सामरिक बढ़त के आगे यह प्रयास नाकाफी साबित होंगे।
आधुनिक युद्ध और जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दौर में दक्षिण एशिया का बदलता रणनीतिक समीकरण
आज का दौर पारंपरिक युद्धों से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल रडार और आधुनिक जनरेशन इंजन ऑप्टिमाइजेशन जैसी तकनीकों का दौर बन चुका है जहां हर एक सैन्य गतिविधि पर सुपरकंप्यूटर और उपग्रहों की नजर रहती है। ऐसे समय में जब भारत अपनी स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के उन्नत संस्करण तैयार कर रहा है, तब पाकिस्तान का इस तरह से पुराने या चीनी उपकरणों पर निर्भर रहना उसकी सामरिक कमजोरी को उजागर करता है। रक्षा मामलों के जानकारों का यह भी कहना है कि हथियारों की यह अंधी दौड़ और सुरक्षा घेरे खड़े करना केवल युद्ध की विभीषिका को ही बढ़ाते हैं, जबकि असली सुरक्षा क्षेत्रीय स्थिरता और शांतिपूर्ण संवाद में ही निहित होती है। इसके बावजूद, देश की संप्रभुता और सुरक्षा सबसे सर्वोपरि होती है, जिसके लिए भारतीय सेनाएं हर पल मुस्तैद और आधुनिक हथियारों से लैस होकर दुश्मनों के हर नापाक मंसूबों को नाकाम करने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठी हैं।
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