
रेगिस्तानी शहर जोधपुर की आबोहवा इस समय देश और दुनिया के रक्षा क्षेत्र के सबसे बड़े आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। भारतीय वायु सेना और जापान की एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के बीच एक ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण साझा युद्धाभ्यास का आगाज राजस्थान के इस रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील जोधपुर एयरबेस पर हो चुका है। आसमान की बुलंदियों को छूने वाले इस महा-युद्धाभ्यास में दुनिया के सबसे बेहतरीन और अत्याधुनिक फाइटर जेट्स आमने-सामने अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मेगा एक्सरसाइज का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच तालमेल को बेहतर करना, युद्धक रणनीतियों का आदान-प्रदान करना और किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए संयुक्त कौशल को धार देना है। जब से इस युद्धाभ्यास की शुरुआत हुई है, तभी से जोधपुर के आसमान में गूंजने वाली फाइटर जेट्स की गर्जना ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस सैन्य अभ्यास में भाग लेने के लिए भारत और जापान दोनों देशों के शीर्ष एयर चीफ विशेष रूप से जोधपुर एयरबेस पहुंचे हैं, जो इस पूरे आयोजन के भू-राजनीतिक और सामरिक महत्व को और अधिक बढ़ा देता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धाभ्यास न केवल दोनों मित्र देशों के रक्षा संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करने की दिशा में भी एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
स्वदेशी तेजस और मारक राफेल के साथ जापानी एफ-2 फाइटर जेट्स की आसमान में रोमांचक भिड़ंत
इस युद्धाभ्यास का सबसे बड़ा और रोमांचक आकर्षण भारत के स्वदेशी फाइटर जेट तेजस, फ्रांस निर्मित घातक राफेल और जापान के अत्याधुनिक एफ-2 फाइटर जेट्स (F-2 Fighter Jets) की एक साथ मौजूदगी है। जब भारत की शान कहे जाने वाले स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस अपनी फुर्ती दिखाते हैं और राफेल अपनी बेजोड़ मारक क्षमता के साथ आसमान में उड़ान भरते हैं, तो उनका मुकाबला करने के लिए जापानी वायु सेना के एफ-2 विमान भी पूरी ताकत से आकाश में गरजते नजर आते हैं। इन तीनों ही विमानों की तकनीकी विशेषताएं, रडार सिस्टम और मिसाइल क्षमताएं अलग-अलग हैं, जिसके कारण इस युद्धाभ्यास के दौरान डॉग फाइट (Dog Fight) और हवा में ही ईंधन भरने जैसे जटिल पैंतरे देखने को मिल रहे हैं। भारतीय पायलटों और जापानी वायु सैनिकों के बीच का यह तकनीकी और व्यावहारिक आदान-प्रदान दोनों देशों की युद्धक तैयारियों को एक नए स्तर पर ले जा रहा है। सोशल मीडिया और रक्षा चैनलों पर इन फाइटर जेट्स के करतब दिखाते हुए वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिन्हें देखकर हर देशवासी का सीना गर्व से चौड़ा हो रहा है। यह पहला मौका है जब जापानी एयर फोर्स के फाइटर जेट्स भारतीय धरती पर आकर इस तरह का कोई बड़ा युद्धाभ्यास कर रहे हैं, जो भारतीय वायु सेना की बढ़ती वैश्विक साख और तकनीकी दक्षता का खुला प्रमाण है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक सहयोग की नई इबारत और भविष्य की रक्षा रणनीतियों का संदेश
जोधपुर में चल रहा यह भारत-जापान वायु सेना का युद्धाभ्यास केवल दो देशों के बीच का सैन्य अभ्यास भर नहीं है, बल्कि यह बदलती हुई वैश्विक भू-राजनीति और सुरक्षा समीकरणों का एक बहुत बड़ा संदेश है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते क्षेत्रीय तनावों और रणनीतिक चुनौतियों के बीच भारत और जापान का इस तरह से एक मंच पर आना दुनिया के कई देशों की निगाहों में है। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को इस युद्धाभ्यास के जरिए और अधिक मजबूत कर रहे हैं। दोनों देशों के एयर चीफ्स ने इस दौरान जमीनी हालात का जायजा लिया और भविष्य में इस तरह के संयुक्त अभियानों को और अधिक व्यापक बनाने पर अपनी सहमति जताई है। जोधपुर एयरबेस पर तैनात तकनीकी टीमों और पायलटों के बीच हुआ यह अनुभव साझा करना आने वाले समय में दोनों सेनाओं के बीच ज्वाइंट ऑपरेशंस को बेहद आसान बना देगा। इस महा-युद्धाभ्यास का सफल आयोजन यह साबित करता है कि भारतीय रक्षा बल अब विश्व स्तर पर अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बना चुके हैं, जो न केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं बल्कि वैश्विक शांति में भी अपना अहम योगदान दे रहे हैं।
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