जानलेवा इंजेक्शन के बाद भी जिंदा बची क्रिस्ता पाइक: अस्पताल से लौटीं जेल, अमेरिका में मृत्युदंड पर छिड़ी नई बहस

अमेरिका के टेनेसी राज्य से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने दुनिया भर के मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मौत की सजा पाने के बाद जानलेवा इंजेक्शन दिए जाने के बावजूद चमत्कारिक रूप से जीवित बचने वाली 50 वर्षीय कैदी क्रिस्टा पाइक (Christa Pike) को अब अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और उन्हें वापस जेल भेज दिया गया है। इस दुर्लभ घटना के सामने आने के बाद अमेरिका में एक बार फिर मृत्युदंड (Death Penalty) की नैतिकता, सुरक्षा और उसके तौर-तरीकों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।

जानलेवा इंजेक्शन के बाद भी कैसे जिंदा बचीं क्रिस्टा पाइक

यह पूरा मामला पिछले हफ्ते 30 सितंबर का है, जब क्रिस्टा पाइक को मौत की सजा देने के लिए 'पेंटोबार्बिटल' नामक घातक जहरीली दवा के दो डोज दिए गए थे। यह खुराक आमतौर पर किसी भी इंसान की जान लेने के लिए पर्याप्त मानी जाती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इससे उनकी मौत नहीं हुई। इसके बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां वे होश में आ गईं। हालांकि, उनके वकीलों का कहना है कि इस घटना के बाद उनकी मानसिक स्थिति अभी थोड़ी भ्रमित है।

'डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर' (DPIC) के आंकड़ों के मुताबिक, क्रिस्टा पाइक अमेरिकी इतिहास की इकलौती ऐसी कैदी हैं जो जानलेवा इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी जिंदा बच निकली हैं। उनके वकीलों ने बताया कि स्थानीय अस्पताल से डिस्चार्ज मिलने के बाद उन्हें वापस 'डेबोरा के. जॉनसन रिहैबिलिटेशन सेंटर' भेज दिया गया है, जहां वे पिछले 30 सालों से बंद हैं। अब जेल के अंदर ही उनकी मेडिकल देखरेख जारी रहेगी।

कौन हैं क्रिस्टा पाइक और उन्हें क्यों मिली थी मौत की सजा

क्रिस्टा पाइक को महज 18 साल की उम्र में टेनेसी में हत्या के एक मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर एक जॉब ट्रेनिंग कैंप में 19 साल की कॉलीन स्लेमर की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी, जिसके बाद अदालत ने उन्हें मृत्युदंड का फैसला सुनाया था।

अमेरिका में मृत्युदंड को लेकर गरमाई राजनीति और नैतिकता की बहस

इस असफल फांसी के बाद अमेरिका में एक बार फिर मौत की सजा को समाप्त किए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। पाइक के वकीलों ने टेनेसी के गवर्नर बिल ली से अपील की है कि उनकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया जाए। गवर्नर ने फिलहाल राज्य में सभी तरह की फांसी की सजाओं पर रोक लगा दी है, ताकि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जा सके। इस बीच, वेटिकन और मानवाधिकार संगठन भी इस तरह की सजाओं के विरोध में खुलकर सामने आ रहे हैं, जिससे यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

Check Also

पश्चिम बंगाल में ED का बड़ा एक्शन: कॉर्पोरेट कंपनी के 139 बैंक खाते फ्रीज, छापेमारी में 3 लग्जरी गाड़ियां और बेहिसाब नकदी जब्त; मचा हड़कंप

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल में सक्रिय एक प्रमुख कॉर्पोरेट कंपनी और उसके निदेशकों …