
वन्यजीव प्रेमियों, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और प्रकृति के शौकीनों के लिए अपने हाई-एंड कैमरे और दूरबीन तैयार रखने का वक्त आ गया है। उत्तर प्रदेश के तराई अंचल में स्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात ‘पीलीभीत टाइगर रिजर्व’ (Pilibhit Tiger Reserve – PTR) के द्वार पर्यटकों के लिए खोलने की उल्टी गिनती औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन काल और वर्षा जलभराव के चलते हर साल जुलाई से अक्टूबर तक बंद रहने वाला यह संरक्षित वन क्षेत्र 1 नवंबर 2026 से सैलानियों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। वन विभाग ने सफारी ट्रैक्स की मरम्मत, वॉच टावरों के सुदृढ़ीकरण और इको-टूरिज्म केंद्रों की साज-सज्जा का काम युद्धस्तर पर पूरा कर लिया है। वैश्विक स्तर पर बाघों की आबादी तेजी से दोगुना करने के लिए प्रतिष्ठित ‘TX2 इंटरनेशनल अवार्ड’ जीत चुके इस टाइगर रिजर्व में इस बार बाघों की चहलकदमी और साइटिंग्स को लेकर पर्यटकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सबसे अनूठी और आकर्षक पहचान इसका विश्व प्रसिद्ध ‘चूका बीच’ (Chuka Beach) इको-टूरिज्म स्पॉट है। विशालकाय शारदा सागर बांध के किनारे फैली सफेद रेत और अथाह जलराशि के चलते यह क्षेत्र किसी खूबसूरत समुद्री तट जैसा अहसास कराता है। घने साल (Sal) के जंगलों से घिरा यह किनारा न केवल पर्यटकों के विश्राम और बोटिंग के लिए आदर्श स्थल है, बल्कि शाम और सुबह के समय वन्यजीवों का मुख्य जलस्रोत भी है। पिछले सत्रों में चूका बीच के आसपास खुले में टहलते, पानी पीते और धूप सेकते रॉयल बंगाल टाइगर्स की कई तस्वीरें वायरल हो चुकी हैं। इस बार वन विभाग ने चूका इको-टूरिज्म परिसर में स्थित थारू हट्स, ट्री-हाउस (मचान) और वॉटर कॉटेज को आधुनिक सुविधाओं के साथ नए सिरे से अपग्रेड किया है ताकि सैलानी प्रकृति की गोद में रहकर जंगल के वास्तविक रोमांच का अनुभव कर सकें।
सफारी के दौरान बाघों के दीदार (Tiger Sighting) की सबसे ज्यादा गारंटी उन इलाकों में होती है जहां घने जंगल के बीच प्राकृतिक या कृत्रिम जलाशय मौजूद हों। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के भीतर स्थित ‘भीमताल’ और प्रसिद्ध ‘बारहासिंघा ताल’ ऐसे ही प्रमुख हॉटस्पॉट्स हैं। सर्दियों की शुरुआत और गर्मियों के महीनों में प्यास बुझाने के लिए बाघ अक्सर अपने शावकों के साथ इन तालों के किनारे घंटों अठखेलियां करते नजर आते हैं। इसके अलावा, इन जलाशयों के पास दलदली घास के मैदानों में संकटग्रस्त प्रजाति के बारहसिंघा (Swamp Deer), चीतल, पाढ़ा (Hog Deer), सांभर और जंगली सूअर बड़ी संख्या में चरने आते हैं। शिकार की तलाश में बाघों की मौजूदगी इन वाटर बॉडीज के इर्द-गिर्द सबसे सघन रहती है, जिससे यहां सफारी जिप्सियों में सवार पर्यटकों को शानदार वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के दुर्लभ अवसर मिलते हैं।
चूका और भीमताल के अलावा ‘बाइफरकेशन पॉइंट’ (Bifurcation Point) और ‘सप्त सरोवर’ पीलीभीत का दूसरा सबसे प्रमुख आकर्षण केंद्र हैं। शारदा नहर के इस संगम स्थल पर जहां नहरी पानी का शांत प्रवाह मन मोह लेता है, वहीं सर्दियों के दिनों में साइबेरिया और मध्य एशिया से आने वाले हजारों विदेशी प्रवासी पक्षियों का डेरा जम जाता है। 300 से अधिक दुर्लभ पक्षी प्रजातियों, जैसे लेसर फ्लोरिकन, बंगाल फ्लोरिकन, हॉर्नबिल और किंगफिशर के लिए यह इलाका बर्ड-वॉचर्स का स्वर्ग माना जाता है। इसके साथ ही ‘पायथन पॉइंट’ (Python Point) पर विशाल भारतीय अजगरों को धूप सेकते देखना सफारी के रोमांच को दोगुना कर देता है। महोफ और बराही रेंज के गहरे जंगलों से होकर गुजरने वाले ट्रैक्स पर जैसे ही जिप्सी आगे बढ़ती है, पक्षियों की चहचहाहट और लंगूरों की अलार्म कॉल जंगल में बाघ की मौजूदगी का सीधा संकेत देती है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी प्रतिदिन दो शिफ्टों में संचालित की जाती है—मॉर्निंग शिफ्ट और इवनिंग शिफ्ट। 1 नवंबर से 31 मार्च तक सर्दियों की समय-सारणी के अनुसार सुबह की सफारी सूर्योदय के समय 6:30 बजे से 10:00 बजे तक और दोपहर की सफारी 2:30 बजे से सूर्यास्त तक संचालित होगी। पर्यटकों की भारी आमद को देखते हुए वन विभाग ने आधिकारिक इको-टूरिज्म पोर्टल पर ऑनलाइन परमिट और सफारी बुकिंग की विंडो सक्रिय कर दी है। महोफ गेट और मुस्तफाबाद गेट से अधिकृत 6-सीटर खुली जिप्सियों के जरिए ही जंगल में प्रवेश की अनुमति दी जाती है। सुरक्षा और नियमों के पालन के लिए प्रत्येक जिप्सी के साथ वन विभाग का एक प्रशिक्षित गाइड और वायरलेस सिस्टम होना अनिवार्य किया गया है।
इस बार पर्यटन सीजन को लेकर प्रशासन ने कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव भी किए हैं। रिजर्व में अत्यधिक भीड़ को नियंत्रित करने और ईको-सिस्टम को संतुलित रखने के लिए सामान्य कार्यदिवसों (सोमवार से शुक्रवार) की तुलना में शनिवार और रविवार (वीकेंड्स) पर प्रवेश और सफारी शुल्क में हल्का अंतर निर्धारित किया गया है। टाइगर रिजर्व प्रशासन ने पर्यटकों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं: जंगल के भीतर किसी भी प्रकार के प्लास्टिक का उपयोग, लाउड म्यूजिक, धूम्रपान, शराब का सेवन और वन्यजीवों को उकसाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। पर्यटकों को हल्के और प्राकृतिक रंगों (खाकी, ऑलिव ग्रीन, मटमैला) के कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है ताकि जंगल के वातावरण में किसी प्रकार का व्यवधान न हो। यदि आप भी इस सर्दियों में महानगरों के प्रदूषण से दूर प्रकृति के अलौकिक सौंदर्य और बाघों की राजसी दुनिया को करीब से देखना चाहते हैं, तो पीलीभीत टाइगर रिजर्व आपका अगला सबसे मुफीद ठिकाना बनने के लिए तैयार है।
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