
दुनियाभर में सुरक्षित यात्रा, शांति, कम अपराध दर और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर एक नई और बेहद दिलचस्प ग्लोबल सेफ्टी रैंकिंग सामने आई है। बर्कशायर हाथवे ट्रेवल प्रोटेक्शन (BHTP) द्वारा जारी की गई दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों की इस नई सूची ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस ताजा वार्षिक सूची में उत्तरी अमेरिकी देश कनाडा ने तमाम दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए पहला यानी शीर्ष स्थान हासिल किया है। वहीं दूसरी ओर, दुनिया की महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका (US) को इस बार टॉप-10 सूची में जगह नहीं मिल पाई है, जिससे भू-राजनीतिक और यात्रा विश्लेषकों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। यह रिपोर्ट यात्रियों के अनुभव, हिंसक अपराधों से सुरक्षा, आतंकवाद मुक्त माहौल, परिवहन सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी पैमानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
कनाडा ने मारी बाजी और वैश्विक पायदान पर छलांग
कनाडा ने इस नई रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सीधे पहला स्थान हासिल किया है। पिछले कुछ संस्करणों की तुलना में कनाडा ने अपनी स्थिति में जबरदस्त सुधार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और एलजीबीटीक्यू+ यात्रियों के लिए सुरक्षा के मामले में कनाडा को सर्वोच्च अंक मिले हैं। इसके अलावा, यहां violent crime (हिंसक अपराध) की कम दर और स्वास्थ्य सेवाओं की उत्कृष्टता ने इसे दुनिया भर के पर्यटकों और प्रवासियों के लिए सबसे भरोसेमंद देश बना दिया है। कनाडा का शीर्ष पर पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि कड़े कानूनों और सामाजिक सद्भाव वाले देश पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं।
टॉप-10 देशों की सूची में कौन-कौन है शामिल?
इस प्रतिष्ठित रैंकिंग में कनाडा के बाद दुनिया के अन्य सबसे सुरक्षित देशों ने भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। सूची में न्यूजीलैंड दूसरे स्थान पर काबिज है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ शांतिप्रिय माहौल के लिए जाना जाता है। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया तीसरे और आइसलैंड चौथे स्थान पर अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। एशियाई देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए जापान ने पांचवां स्थान हासिल किया है, जो अपनी अनुशासित जीवनशैली और कम अपराध दर के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसके बाद यूरोपीय देशों का दबदबा देखने को मिलता है, जिसमें ऑस्ट्रिया छठे, आयरलैंड सातवें, नीदरलैंड्स आठवें और डेनमार्न नौवें पायदान पर रहे। पुर्तगाल ने इस सूची के दसवें स्थान पर रहकर अपना सफर पूरा किया है।
अमेरिका को टॉप-10 से बाहर क्यों होना पड़ा?
दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति और आर्थिक रूप से संपन्न देश होने के बावजूद अमेरिका का इस प्रतिष्ठित सूची के शीर्ष दस देशों में शामिल न होना एक बड़ा चर्चा का विषय बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के भीतर गन वायलेंस (बंदूक हिंसा), सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी कुछ चिंताएं और बड़े शहरों में बढ़ते अपराध के आंकड़ों ने इसकी रैंकिंग को प्रभावित किया है। हालांकि अमेरिका एक शक्तिशाली राष्ट्र है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत यात्रा के तय मानकों पर यह कई यूरोपीय और एशियाई देशों से पिछड़ गया है, जिसके चलते यह सूची में शीर्ष स्थान पाने से चूक गया।
स्वास्थ्य और परिवहन सुरक्षा जैसे पैमानों पर कसौटी
किसी भी देश को सुरक्षित घोषित करने से पहले उसकी आंतरिक सुरक्षा के कई कड़े पैमानों का बारीकी से मूल्यांकन किया जाता है। इस इंडेक्स को तैयार करने में ग्लोबल पीस इंडेक्स, न्युम्बेओ डेटा, जियोश्योर ग्लोबल और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों को आधार बनाया गया है। इसमें मुख्य रूप से यह देखा जाता है कि देश में आतंकवाद का जोखिम कितना कम है, वहां की परिवहन व्यवस्था (Transportation Safety) कितनी आधुनिक और सुरक्षित है, तथा आपातकालीन स्थितियों में स्वास्थ्य सेवाएं कितनी तेजी से मिलती हैं। इन सभी कड़े मानकों पर खरा उतरने के बाद ही देशों की यह अंतिम सूची तैयार की जाती है।
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