उत्तराखंड के 309 दुर्गम गांवों को मिलेगी पक्की सड़क की सौगात, PMGSY-4 के तहत 184 मार्गों पर निर्माण कार्य तेज

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड के दुर्गम और सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से बड़ी बुनियादी ढांचागत सौगात सामने आई है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ के चौथे चरण (PMGSY-4) के अंतर्गत राज्य के 309 अनछुए गांवों को पक्की बारहमासी सड़कों से जोड़ने का खाका पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। इस महा-परियोजना के तहत उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में चिन्हित 184 ग्रामीण सड़कों के निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण की तकनीकी व प्रशासनिक प्रक्रियाओं को युद्धस्तर पर तेज कर दिया गया है।

पहाड़ी इलाकों में भौगोलिक विषमताओं, भूस्खलन और कठिन चट्टानी रास्तों के कारण आज भी कई बस्तियां मुख्य धारा से कटी हुई हैं। बीमार व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सड़क तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को कई किलोमीटर तक डोली या डंडी-कंडी का सहारा लेना पड़ता है। पीएमजीएसवाई-4 के लागू होने से न केवल ग्रामीणों की यह रोजमर्रा की पीड़ा समाप्त होगी, बल्कि पलायन (Migration) की गंभीर समस्या से जूझ रहे सीमांत और पर्वतीय गांवों में नए आर्थिक अवसर भी पैदा होंगे।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का चौथा चरण विशेष रूप से उन दूरदराज की बस्तियों और टोलों को लक्षित करता है जो पिछले तीन चरणों के निर्धारित जनसंख्या मानकों के कारण छूट गए थे। पहाड़ी और विशेष श्रेणी वाले राज्यों के लिए तय नए नियमों के तहत अब 100 से 250 की छोटी आबादी वाली दूरस्थ बसावटों को भी पक्की ऑल-वेदर रोड (All-Weather Road) नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है।

उत्तराखंड ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (URRDA) और लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के अनुसार, इन 184 प्रमुख सड़कों के निर्माण से गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों के 309 गांव सीधे नेशनल और स्टेट हाईवे से जुड़ जाएंगे। इन सड़कों को आधुनिक सुरक्षा मानकों, मजबूत ड्रेनेज सिस्टम, रिटेनिंग वॉल और क्रैश बैरियर के साथ डिजाइन किया जा रहा है ताकि भारी मानसूनी बारिश और भूस्खलन के दौरान भी संपर्क मार्ग बाधित न हों।

इस योजना के तहत उन जिलों को विशेष प्राथमिकता दी गई है जो सामरिक दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं (चीन और नेपाल) के करीब हैं या जहां भौगोलिक परिस्थितियां बेहद जटिल हैं:

  • पिथौरागढ़ और चमोली: सीमांत क्षेत्रों की दूरस्थ घाटियों में स्थित बस्तियों तक पहुंच सुगम होगी, जिससे सीमा सुरक्षा बलों के साथ-साथ स्थानीय आबादी को निर्बाध आवागमन मिलेगा।

  • उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग: चारधाम यात्रा मार्गों के फीडर नेटवर्क और ऊंचाई वाले सेब उत्पादक गांवों को मुख्य मंडियों से जोड़ा जाएगा।

  • पौड़ी गढ़वाल, टिहरी और अल्मोड़ा: सबसे ज्यादा पलायन से प्रभावित इन जिलों के भीतरी ब्लॉक जैसे थलीसैंण, रिखणीखाल, पोखड़ा और चौखुटिया के दर्जनों गांव पक्की डामर सड़क से जुड़ेंगे।

  • बागेश्वर और चंपावत: सरयू और काली नदी घाटी के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में किसानों और बागवानों को अपनी फसलें समय पर बाजार पहुंचाने में मदद मिलेगी।

पहाड़ों में पक्की सड़क केवल एक आवागमन का साधन नहीं होती, बल्कि वह जीवनरेखा (Lifeline) का काम करती है। उत्तराखंड सरकार का मानना है कि इन 184 सड़कों का जाल बिछने से राज्य के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेंगे:

  • होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन का विस्तार: सड़क पहुंचने से पर्यटक अनछुए प्राकृतिक स्थलों और ऑफबीट डेस्टिनेशन्स तक आसानी से पहुंच सकेंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए होमस्टे, गाइडिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स में स्वरोजगार के दरवाजे खुलेंगे।

  • कृषि और बागवानी उत्पादों को उचित मूल्य: काश्तकारों के नाशपाती, सेब, माल्टा, राजमा और जैविक अनाज समय रहते देहरादून, हल्द्वानी और दिल्ली की बड़ी आजादपुर मंडी तक पहुंच सकेंगे, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होगी।

  • स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाएं: 108 एंबुलेंस सेवा अब सीधे गांव के मुहाने तक पहुंच सकेगी, जिससे आपात स्थिति में समय पर इलाज मिलने से अनमोल जानें बचाई जा सकेंगी।

  • शिक्षा की राह होगी आसान: प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के लिए छात्र-छात्राओं को खतरनाक पगडंडियों से होकर गुजरने की मजबूरी नहीं रहेगी।

सड़क परिवहन और ग्रामीण विकास मंत्रालय ने निर्माण एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि हिमालय के संवेदनशील पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी’ (Green Roads Technology) का उपयोग किया जाए। सड़कों के निर्माण में कोल्ड मिक्स एस्फाल्ट, जियो-टेक्सटाइल्स, वेस्ट प्लास्टिक और ढलानों को स्थिर करने के लिए बायो-इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

गुणवत्ता नियंत्रण के लिए नेशनल क्वालिटी मॉनिटर्स (NQM) और स्टेट क्वालिटी मॉनिटर्स (SQM) की टीमें समय-समय पर साइट पर जाकर लैब टेस्ट करेंगी। इसके अलावा ऑनलाइन ‘मेरी सड़क’ ऐप के जरिए आम जनता को भी सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सीधी शिकायत या फीडबैक दर्ज करने का अधिकार दिया गया है। 184 सड़कों पर काम को तेजी से पूरा कर तय समय-सीमा के भीतर ग्रामीणों को समर्पित करने का लक्ष्य रखा गया है।

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