नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वार-पलटवार का दौर तेज हो गया है। इस बार समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निशाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्सप्रेसवे निर्माण की जिम्मेदारी संभालने वाली संस्था ‘उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण’ (यूपीडा) का नियंत्रण कैबिनेट मंत्री नंदी के विभाग से वापस लेकर सीधे अपने पास रख लिया है। इस प्रशासनिक फेरबदल को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला है और इसे भ्रष्टाचार तथा आंतरिक खींचतान से जोड़कर भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
अखिलेश यादव का बड़ा दावा: ‘225 सीटों पर भाजपा बदलने जा रही है अपने प्रत्याशी’
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि लोकसभा चुनावों में करारी शिकस्त के बाद भाजपा के भीतर भारी हताशा है। उन्होंने लिखा, ‘सुना है कि प्रयागराज (इलाहाबाद) की सभी सीटों पर भाजपा अपने प्रत्याशी बदलने जा रही है, क्योंकि पार्टी को अब समझ आ गया है कि उनके विधायक केवल खाने-कमाने में लगे रहे, जिसके कारण लोकसभा सीट हाथ से निकल गई।’
अखिलेश ने आगे कहा कि यही फॉर्मूला उत्तर प्रदेश की उन सभी 43 लोकसभा सीटों पर भी लागू किया जा रहा है जहां इंडिया (INDIA) गठबंधन की जीत हुई थी, और उन 9-10 सीटों पर भी जहां भाजपा ने हेरफेर करके सर्टिफिकेट हासिल किया था। इस हिसाब से साल 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा लगभग 225 सीटों पर अपने उम्मीदवार बदलने की तैयारी में है।
कैबिनेट मंत्री नंदी पर कसा तंज: ‘अभी हाफ हुए हैं, विधानसभा में साफ हो जाएंगे’
अखिलेश यादव ने बिना किसी का नाम लिए कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी पर सीधा निशाना साधा। यूपीडा को नंदी के विभाग से हटाए जाने पर तंज कसते हुए सपा मुखिया ने कहा, ‘जब सारे घटिया एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो गए और आपसी लेनदेन का टारगेट पूरा हो गया, तब हटाया तो क्या हटाया?’ उन्होंने आगे चेतावनी भरे लहजे में कहा कि लोकसभा चुनाव में तो ये ‘हाफ’ (आधे) हुए हैं, और अगर आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी ने इनका टिकट काट दिया तो ये पूरी तरह ‘साफ’ हो जाएंगे। अखिलेश ने यह भी दावा किया कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के बढ़ते प्रभाव के सामने भाजपा के मूल वोटर अब एक-चौथाई भी नहीं बचे हैं, इसलिए वर्तमान भाजपा विधायक अपनी कमाई चुनाव में खर्च करने के बजाय भविष्य के लिए बचाना चाहते हैं।
क्यों किया गया यूपीडा के कार्य आवंटन में यह बड़ा बदलाव?
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को यूपीडा की कमान औद्योगिक विकास विभाग से वापस लेकर अवस्थापना विकास विभाग के अधीन कर दी थी। यूपी सरकार में अवस्थापना मंत्रालय सीधे मुख्यमंत्री के पास है, जबकि औद्योगिक विकास विभाग कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी संभाल रहे हैं। इस फैसले के बाद अब एक्सप्रेसवे और उससे जुड़ी सभी बड़ी परियोजनाओं की फाइलें सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय की देखरेख में तय होंगी।
सरकारी आदेश के मुताबिक, यूपीडा के कार्यों के आवंटन में आ रहे विरोधाभास को दूर करने और फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी व सुगम बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। नीति निर्धारण और सार्वजनिक-निजी सहभागिता (PPP Model) के कार्यों में समन्वय बेहतर करने के उद्देश्य से यूपीडा से जुड़े सभी काम तत्काल प्रभाव से अवस्थापना विभाग को स्थानांतरित कर दिए गए हैं।
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