नई दिल्ली: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आम नागरिकों पर ढाए जा रहे जुल्म और बर्बरता को लेकर भारत ने वैश्विक मंच पर इस्लामाबाद की धज्जियां उड़ा दी हैं। मंगलवार को भारत ने PoK में मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन को लेकर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दो टूक शब्दों में कहा कि वह इस मुल्क को उसके अत्याचारों के लिए हर हाल में जवाबदेह ठहराए। भारत का यह तीखा बयान PoK के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस की खूनी कार्रवाई के बाद आया है, जिसमें कथित तौर पर 20 से अधिक बेकसूर लोगों की जान जा चुकी है और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
फेक न्यूज फैलाकर अपनी नाकामी छिपा रहा है पाकिस्तान: विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान की हताशा को उजागर किया। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद अपनी आंतरिक नाकामियों को छिपाने और दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए एक घटिया हथकंडा अपना रहा है। रणधीर जायसवाल ने कहा, “इस पूरे घटनाक्रम के बीच हम पाकिस्तान की तरफ से आने वाली फेक न्यूज और मनगढ़ंत वीडियो का एक नया चलन लगातार देख रहे हैं। यह और कुछ नहीं, बल्कि अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने और मानवाधिकारों के उल्लंघन से दुनिया की नजरें चुराने की पाकिस्तान की एक हताशा भरी कोशिश है।”
प्रवक्ता ने आगे कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से पुलिस की भारी बर्बरता की बेहद चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं, जहां कई प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतार दिया गया है। भारत को उम्मीद है कि वैश्विक समुदाय चुप नहीं बैठेगा और पाकिस्तान को उसकी इस घिनौनी ज्यादती के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कटघरे में खड़ा करेगा।
आखिर PoK में क्यों लगी है विद्रोह की आग? जानिए असली वजह
अब सवाल उठता है कि आखिर PoK के लोग अचानक इस कदर उग्र क्यों हो गए हैं? दरअसल, यह पूरा बवाल शरणार्थियों (Refugees) के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को लेकर शुरू हुआ है। वहां आंदोलन चला रही ‘जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) का सीधा आरोप है कि पाकिस्तान की केंद्र सरकार और वहां की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां इन आरक्षित सीटों का इस्तेमाल स्थानीय लोगों के हक मारने और अपनी कठपुतली सरकार बनाने के लिए करती हैं।
गठबंधन का तर्क है कि 45 सदस्यों वाली PoK विधानसभा में ये 12 सीटें स्थानीय लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को पूरी तरह कमजोर कर देती हैं। इन सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर पूरा इलाका सुलग उठा है। आगामी 27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले इस राजनीतिक खींचतान ने बेहद हिंसक रूप अख्तियार कर लिया है, जो हाल के वर्षों में इस क्षेत्र की सबसे घातक अशांति मानी जा रही है।
सेना के अस्पताल पर हमला और प्रतिबंध के बाद भड़का आक्रोश
यह हिंसक झड़प उस वक्त और तेज हो गई जब रावलकोट में जेएएसी (JAAC) के समर्थकों ने अपने एक साथी कार्यकर्ता की संदिग्ध हत्या के विरोध में मार्च निकाला और सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया। देखते ही देखते रावलकोट और आसपास के इलाके जंग के मैदान में तब्दील हो गए। स्थानीय पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस भीषण हिंसा में कम से कम चार सुरक्षाकर्मी भी मारे गए हैं और 20 से ज्यादा पुलिसवाले घायल हुए हैं।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर रावलकोट में सेना द्वारा संचालित एक अस्पताल पर हमला करने और सरकारी संपत्तियों को फूंकने का आरोप लगाया है। तनाव को और हवा तब मिली जब गत 5 जून को क्षेत्रीय प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत एक प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। सरकार के इस दमनकारी कदम ने जलती आग में घी का काम किया है और आंदोलनकारियों व पाकिस्तानी हुक्मरानों के बीच का गतिरोध अब पूरी तरह बेकाबू हो चुका है।
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