नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित एक भव्य रक्षा अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के जांबाज सपूतों को वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित देश की कई बड़ी राजनीतिक और सैन्य शख्सियतों की मौजूदगी में भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो (MARCOS) लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर को प्रतिष्ठित ‘शौर्य चक्र’ से नवाजा गया। सूरज पराशर को यह सम्मान जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में नवंबर 2024 में चलाए गए एक बेहद खतरनाक और जटिल सैन्य ऑपरेशन में उनके अदम्य साहस, सूझबूझ और बेमिसाल नेतृत्व के लिए दिया गया है।
आधी रात को शुरू हुआ था ‘ऑपरेशन चुंतावाड़ी’
यह पूरी कहानी जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा स्थित चुंतावाड़ी गांव की है, जहां 5 और 6 नवंबर 2024 की दरमियानी रात को सुरक्षाबलों को कुछ खूंखार विदेशी आतंकियों के छिपे होने का इनपुट मिला था। इसके बाद भारतीय सेना, पुलिस और नौसेना के मरीन कमांडो की एक संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान (CASO) शुरू किया। खुद को चारों तरफ से घिरा देख एक घर में दुबके आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
हालात बिगड़ते देख लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर ने बिना वक्त गंवाए मोर्चा संभाला। उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए तुरंत एक रणनीतिक और ऊंचाई वाली जगह पर अपनी पोजीशन मजबूत की, ताकि आतंकियों की हर हरकत पर नजर रखी जा सके। वह रेंगते हुए लक्ष्य क्षेत्र के बेहद करीब पहुंचे और पूरी स्थिति का सटीक आकलन किया। इसी बीच, एक मुस्तैद आतंकवादी घेरा तोड़कर भागने की फिराक में था और उसने सुरक्षाबलों पर सीधा हमला बोल दिया, जिसमें कुछ सैनिक मामूली रूप से चोटिल भी हुए।
रीयल टाइम इंटेलिजेंस से आतंकियों का खेल खत्म
इस बेहद नाजुक और संकट की घड़ी में लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर ने अद्भुत ठंडे दिमाग और अचूक निशाने का परिचय दिया। उन्होंने भागने की कोशिश कर रहे आतंकवादी पर तुरंत निशाना साधा और सटीक जवाबी गोलीबारी की। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी टीम के बाकी सदस्यों को रीयल टाइम (लाइव) लोकेशन और इनपुट साझा किए। उनके इस सटीक इनपुट की बदौलत ही संयुक्त टीम ने दूसरे आतंकवादी को भी बिना किसी देरी के सफलतापूर्वक ढेर कर दिया।
शाम करीब 8:25 बजे तक दोनों तरफ से गोलीबारी थम चुकी थी और मुख्य कार्रवाई पूरी हो गई थी। लेकिन खतरा अभी टला नहीं था, क्योंकि अंधेरे का फायदा उठाकर कोई और आतंकी हमला कर सकता था। इसके बाद सूरज पराशर ने अगली सुबह सूर्योदय होने तक अपनी पोजीशन नहीं छोड़ी और पूरे इलाके पर पैनी नजर बनाए रखी। सुबह उजाला होने के बाद उन्होंने संयुक्त टीम का नेतृत्व करते हुए पूरे सर्च ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिसके बाद वहां से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार और युद्ध सामग्री बरामद की गई।
देश के इन वीर जवानों को भी मिला शौर्य चक्र
लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर का यह पराक्रम सामान्य कर्तव्य की सीमाओं से कहीं ऊपर था, जिसने न सिर्फ उनके साथियों की जान बचाई बल्कि ऑपरेशन को भी शत-प्रतिशत सफल बनाया। इस शानदार और सफल आतंकवाद विरोधी अभियान के लिए सूरज पराशर के साथ-साथ असिस्टेंट कमांडेंट मोहम्मद शफीक, लेफ्टिनेंट कमांडर राम गोयल और कांस्टेबल सद्दाम हुसैन को भी उनके अद्वितीय साहस के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। इन सभी जांबाजों की बहादुरी ने घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का काम किया है।
लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर भारतीय नौसेना के एक बेहद अनुभवी और जांबाज मरीन कमांडो हैं, जो लंबे समय से देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। राष्ट्रपति भवन से मिली यह पहचान न केवल भारतीय सशस्त्र बलों के हौसले और जज्बे को सातवें आसमान पर ले जाती है, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं को भी राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करती है।
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