नई दिल्ली। हाल के वर्षों में तांबे (Copper) के जग या बोतल में पानी पीने का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। आयुर्वेद से लेकर आधुनिक विज्ञान तक, सभी तांबे के बर्तन में रखे पानी को सेहत के लिए बेहद गुणकारी मानते हैं। लेकिन अज्ञानता के कारण आजकल लोग इसका गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। कई लोग वजन घटाने या डिटॉक्स के चक्कर में तांबे की बोतल में नींबू पानी, जीरा पानी या गर्म पानी भरकर घंटों छोड़ देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों (Doctors) के अनुसार, आपकी यह अनजानी आदत ‘कॉपर पॉइजनिंग’ (तांबे की विषाक्तता) का कारण बन सकती है, जो लीवर और पेट को गंभीर नुकसान पहुंचाती है। आइए जानते हैं तांबे की बोतल से जुड़े जरूरी नियम और सावधानियां।
1. नींबू पानी और खट्टी चीजें: तांबे के साथ मिलकर बनाती हैं एसिडिक जहर
नींबू का रस, छाछ, सिरका या कोई भी खट्टा तरल पदार्थ स्वभाव से अम्लीय (Acidic) होता है। जब आप इन अम्लीय चीजों को तांबे के बर्तन में रखते हैं, तो यह तांबे के साथ बहुत तेजी से रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical Reaction) करता है। इस रिएक्शन के कारण पानी में ‘कॉपर साल्ट’ (तांबे के विषैले लवण) घुल जाते हैं। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, इस विषैले पानी को पीने से शरीर में कॉपर की मात्रा अचानक बढ़ जाती है, जिससे उल्टी और पेट में मरोड़ जैसी दिक्कतें तुरंत शुरू हो सकती हैं।
2. जीरा पानी या डिटॉक्स ड्रिंक्स: भूलकर भी न करें स्टोर
आजकल सोशल मीडिया पर सुबह खाली पेट डिटॉक्स वॉटर या जीरा पानी पीने की सलाह दी जाती है। कई लोग इस पानी को रातभर तांबे की बोतल में रख देते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जीरा पानी या मसालों का पानी भी तांबे के साथ रिएक्ट करता है। तांबे की बोतल में केवल और केवल सादा पानी ही रखा जाना चाहिए। कोई भी अन्य फ्लेवर्ड या मसालेदार पानी इसमें रखने से वह विषैला हो सकता है।
3. गर्म या उबलता पानी: तांबे के रिसाव को कर देता है दोगुना
ठंड के दिनों में या वजन कम करने के लिए लोग अक्सर तांबे की बोतल में गुनगुना या तेज गर्म पानी भर लेते हैं। विज्ञान के अनुसार, उच्च तापमान (Heat) के संपर्क में आते ही तांबे का रिसाव (Copper Leaching) बहुत तेजी से बढ़ जाता है। यानी गर्म पानी में तांबा बहुत जल्दी और भारी मात्रा में घुलने लगता है। ऐसा पानी पीने से शरीर में तांबे की विषाक्तता का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
बोतल के अंदर दिखने वाले ‘हरे निशान’ का क्या है मतलब?
यदि आपकी तांबे की बोतल के अंदर या मुंह पर हरी परत या हरे रंग के धब्बे दिखने लगे हैं, तो सावधान हो जाएं। वैज्ञानिक भाषा में इसे कॉपर कार्बोनेट कहा जाता है, जो तांबे के ऑक्सीकरण (Oxidation) के कारण बनता है। हालांकि यह बाहरी सतह पर नुकसानदेह नहीं है, लेकिन अगर यह बोतल के अंदर है और पानी के जरिए आपके पेट में जाता है, तो यह बेहद हानिकारक है। इसलिए बोतल में अंदर हरी परत जमने पर उसकी नींबू-नमक या इमली से अच्छी तरह सफाई करना अनिवार्य है।
शरीर में ‘कॉपर पॉइजनिंग’ होने पर दिखते हैं ये 5 लक्षण
यदि जाने-अनजाने आप दूषित तांबे का पानी पी रहे हैं, तो आपके शरीर में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
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लगातार जी मिचलाना और मतली आना।
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पेट में अचानक तेज ऐंठन या मरोड़ उठना।
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उल्टी होना, दस्त या पेचिश की शिकायत।
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अत्यधिक थकान और सिरदर्द रहना।
बच्चों को अधिक खतरा: बड़ों की तुलना में बच्चों का शरीर छोटा और संवेदनशील होता है, इसलिए वे कॉपर पॉइजनिंग का शिकार बहुत जल्दी होते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार तांबे की बोतल का उपयोग करने के 5 अचूक नियम
यदि आप तांबे के पानी का पूरा स्वास्थ्य लाभ उठाना चाहते हैं, तो इन नियमों को गांठ बांध लें:
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सिर्फ सादा पानी: बोतल या जग में केवल सामान्य और साफ पीने का पानी ही भरें।
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समय सीमा: पानी को तांबे के बर्तन में कम से कम 6 और अधिकतम 12 घंटे के लिए ही रखें। रात को पानी रखकर सुबह पीना सबसे उत्तम है।
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गर्म पानी से तौबा: इसमें कभी भी चाय, कॉफी, गर्म पानी या नींबू पानी न डालें।
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नियमित सफाई: बोतल को अंदर से रोज साफ करें। हफ्ते में कम से कम दो बार इमली, नींबू या नमक से रगड़कर इसकी हरी परत को पूरी तरह हटा दें।
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जमीन पर न रखें: तांबे के बर्तन को हमेशा लकड़ी के टेबल या किसी ऊंचे स्थान पर रखें, सीधे जमीन पर रखने से इसकी ऊर्जा का ह्रास होता है।
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