नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी प्रियजन के निधन के बाद न केवल उनकी यादें, बल्कि उनसे जुड़ी निजी वस्तुएं भी परिवार के लिए बहुत गहरा भावनात्मक महत्व रखती हैं। दिवंगत व्यक्ति के कपड़े, बिस्तर, चादर, कंबल और पलंग जैसी चीजें उनकी दैनिक ऊर्जा से गहराई से जुड़ी होती हैं। सनातन धर्म के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘गरुड़ पुराण’ में मृत्यु के बाद इन वस्तुओं के रख-रखाव और निस्तारण को लेकर कुछ विशेष और कड़े नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने से न केवल मृत आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि परिवार भी नकारात्मकता और भारीपन से सुरक्षित रहता है। आइए जानते हैं गरुड़ पुराण के अनुसार मृतक की चीजों का क्या करना चाहिए।
क्यों नहीं रखनी चाहिए मृतक की निजी वस्तुएं? जानें इसके पीछे का कारण
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद भी आत्मा का अपनी सांसारिक वस्तुओं और परिवार के प्रति मोह एकदम से समाप्त नहीं होता है। जिन चीजों का व्यक्ति अपने जीवनकाल में सबसे ज्यादा इस्तेमाल करता था, उनमें उसकी सूक्ष्म ऊर्जा (Vibes) लंबे समय तक विद्यमान रहती है। यदि इन वस्तुओं को घर में सहेजकर या बिना शुद्ध किए लंबे समय तक रखा जाए, तो मृत आत्मा का मोह भंग नहीं हो पाता और वह उसी स्थान के इर्द-गिर्द भटकती रहती है। इससे घर का माहौल उदास, भारी और नकारात्मक हो सकता है, जिससे परिवार के सदस्यों को मानसिक बेचैनी या डरावने सपने आ सकते हैं।
मृत परिजन के कपड़ों और बिस्तर का क्या करें? दान का है विशेष महत्व
कपड़े और चादर-बिस्तर व्यक्ति के शरीर के सबसे करीब होते हैं, इसलिए इनमें सबसे ज्यादा ऊर्जा संचित होती है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि सूतक काल (मृत्यु के बाद के 10 से 13 दिन) समाप्त होने के बाद मृतक के कपड़ों और बिस्तर को घर में रखने के बजाय किसी गरीब, जरूरतमंद, साधु या आश्रम में दान कर देना चाहिए। जब इन चीजों का दान किया जाता है, तो मृत आत्मा का सांसारिक वस्तुओं से मोह टूटता है, जिससे उसे आगे की लोक-यात्रा में शांति मिलती है। इस पुण्य कर्म का फल दिवंगत आत्मा को मिलता है और परिवार भी एक अदृश्य भावनात्मक बोझ से मुक्त हो जाता है।
पलंग और बेड को लेकर क्या कहता है गरुड़ पुराण?
मनुष्य अपने जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा अपने पलंग या बेड पर बिताता है, इसलिए पलंग को मृतक की ऊर्जा का मुख्य केंद्र माना जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, यदि संभव हो तो दिवंगत व्यक्ति के उपयोग वाले पलंग को भी दान कर देना चाहिए। हालांकि, यदि ऐसा करना संभव न हो, तो सूतक काल की समाप्ति के बाद उस पलंग को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। उसे कई दिनों तक तेज धूप में सुखाएं, गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें और घर में हवन या विशेष पूजा-पाठ करवाने के बाद ही परिवार का कोई अन्य सदस्य उसका उपयोग करे।
अगर भावनाओं के चलते दान न करना चाहें, तो क्या है शुद्धिकरण की सही विधि?
कई बार अत्यधिक लगाव या किसी अन्य कारण से परिवारजन मृतक की कुछ कीमती वस्तुएं या कपड़े अपने पास रखना चाहते हैं। ऐसी स्थिति के लिए भी गरुड़ पुराण में शुद्धिकरण का विधान बताया गया है:
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धूप और धुलाई: उन वस्तुओं को अच्छी तरह धोकर या साफ करके तेज धूप में सुखाएं ताकि पुरानी ऊर्जा का प्रभाव समाप्त हो सके।
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गंगाजल का प्रयोग: शुद्धिकरण के लिए उन पर गंगाजल का छिड़काव अवश्य करें।
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शिव पूजा या हवन: इन वस्तुओं का दोबारा इस्तेमाल करने से पहले घर में रामायण पाठ, शिव पूजा या गायत्री हवन करवाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह नष्ट हो जाती है और वह वस्तु उपयोग के लिए सुरक्षित हो जाती है।
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