नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शनि के राशि परिवर्तन को सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव डालने वाली घटना माना जाता है। चूंकि शनि देव नवग्रहों में सबसे धीमी गति से चलते हैं और एक राशि में करीब ढाई वर्ष का समय लेते हैं, इसलिए इनका गोचर जीवन में बड़े बदलाव लाता है। वर्तमान में शनि देव मीन राशि में विराजमान हैं, लेकिन साल 2027 में वे मेष राशि में प्रवेश कर जाएंगे। शनि के इस गोचर के साथ ही शुक्र की स्वामित्व वाली वृषभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण यानी ‘उदय चरण’ शुरू होने जा रहा है। आइए जानते हैं वृषभ राशि पर साढ़ेसाती कब शुरू होगी, कब इससे मुक्ति मिलेगी और इसका जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
जानें कब से शुरू होगी वृषभ राशि पर साढ़ेसाती (सटीक तारीखें)
ज्योतिषीय गणना और पंचांग के अनुसार, साल 2027 में शनि का गोचर वृषभ राशि के जातकों के लिए साढ़ेसाती की शुरुआत करेगा:
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साढ़ेसाती का प्रारंभ: 3 जून 2027 को शनि मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके साथ ही वृषभ राशि पर साढ़ेसाती का उदय चरण शुरू हो जाएगा।
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बीच में मिलेगी अस्थाई राहत: 20 अक्टूबर 2027 को शनि वक्री चाल चलते हुए फिर से मीन राशि में लौट आएंगे, जिससे वृषभ राशि पर से साढ़ेसाती का प्रभाव कुछ समय के लिए हट जाएगा।
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साढ़ेसाती की दोबारा वापसी: इसके बाद 23 फरवरी 2028 को शनि देव फिर से मेष राशि में गोचर करेंगे, जहां से वृषभ राशि पर साढ़ेसाती नियमित रूप से जारी रहेगी।
वृषभ राशि वालों को साढ़ेसाती से पूरी मुक्ति कब मिलेगी?
शनि की साढ़ेसाती कुल साढ़े सात साल की होती है, जो तीन चरणों (प्रत्येक ढाई वर्ष) में पूरी होती है। वृषभ राशि के जातकों पर साढ़ेसाती का तीसरा और अंतिम चरण 30 मई 2032 से शुरू होगा। इसके बाद, 13 जुलाई 2034 को शनि के राशि बदलने के साथ ही वृषभ राशि वालों को साढ़ेसाती के सभी कष्टों से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।
मित्र राशि होने के बावजूद कैसा रहेगा शनि का प्रभाव?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वृषभ राशि के स्वामी शुक्र देव हैं, जिन्हें शनि देव का परम मित्र माना जाता है। मित्र राशि होने के कारण वृषभ राशि वालों को अन्य राशियों की तुलना में कम गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि कष्ट नहीं होंगे। साढ़ेसाती के इस पहले चरण में जातकों को निम्नलिखित परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है:
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कामकाज में रुकावट: बने बनाए कामों में रुकावटें आ सकती हैं और सफलता पाने के लिए सामान्य से अधिक कड़ी मेहनत करनी होगी।
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आर्थिक और मानसिक तनाव: अनावश्यक और अचानक आने वाले खर्च बजट बिगाड़ सकते हैं। कर्ज की स्थिति के कारण मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
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स्वास्थ्य और रिश्ते: अनिद्रा (नींद न आना) और सेहत से जुड़ी परेशानियां घेर सकती हैं। पारिवारिक रिश्तों और प्रेम संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। गुप्त शत्रु भी इस दौरान सक्रिय होकर आपको परेशान करने की कोशिश कर सकते हैं।
शनि के अशुभ प्रभावों को कम करने के सरल और अचूक उपाय
यदि आपकी राशि वृषभ है, तो साढ़ेसाती के कुप्रभावों को कम करने और शनि देव को प्रसन्न करने के लिए अभी से ये उपाय शुरू कर सकते हैं:
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हनुमान और शिव जी की शरण: शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए नियमित रूप से भगवान शिव और हनुमान जी की आराधना करें। हनुमान चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी होता है।
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मंत्र जाप: प्रतिदिन या विशेष रूप से शनिवार के दिन शनि मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का कम से कम 108 बार जाप करें।
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सरसों के तेल का दान: शनिवार के दिन किसी जरूरतमंद को सरसों का तेल दान करना शुभ माना जाता है।
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पीपल पूजा: शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं और पेड़ की सात बार परिक्रमा करें।
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